कर्मभूमि एक्सप्रेस हादसा: मुंबई से बिहार जा रही ट्रेन में दर्दनाक घटना, दो की मौत, एक घायल
त्योहारों का मौसम हो और लोग अपने घर जाने की तैयारी करें — ऐसे वक्त में अगर कोई हादसा हो जाए तो वो सिर्फ एक खबर नहीं रहती, वो एक दर्द बन जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ मुंबई से बिहार जा रही कर्मभूमि एक्सप्रेस में, जब एक भयानक हादसे ने कई परिवारों की खुशियों को मात में बदल दिया।
हादसे की पूरी कहानी
मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा नासिक रोड स्टेशन के पास हुआ। ट्रेन में तीन यात्री नीचे गिर गए, जिनमें दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक यात्री गंभीर रूप से घायल है।
यह हादसा भीड़भाड़ के कारण हुआ बताया जा रहा है। दीपावली और बिहार विधानसभा चुनाव के चलते ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ थी। अधिकांश यात्री अपने घर त्योहार मनाने या वोट डालने जा रहे थे।
मौके पर अफरा-तफरी का माहौल
जैसे ही हादसे की खबर फैली, स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोगों ने तुरंत रेल प्रशासन को सूचना दी। रेलवे अधिकारी और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
शवों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है, जबकि घायल यात्री को नासिक के जिला सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि तीनों यात्री 30 से 35 साल की उम्र के थे।
यात्रियों की भीड़ बनी हादसे की वजह
कर्मभूमि एक्सप्रेस हमेशा से बिहार जाने वाले मजदूरों, कामगारों और छात्रों की पसंदीदा ट्रेन रही है। लेकिन इस बार स्थिति और भी खराब थी। दीपावली के सीजन और चुनाव के समय, ट्रेन में सामान्य से दोगुनी भीड़ थी।
कई यात्रियों को खड़े होकर या दरवाजे के पास बैठकर सफर करना पड़ रहा था। इसी दौरान, ट्रेन की स्पीड बढ़ने पर तीन यात्री संतुलन खो बैठे और गिर गए।
प्रशासन ने जताई चिंता
रेलवे प्रशासन ने हादसे पर दुख जताया है और यात्रियों से अपील की है कि वे भीड़भाड़ के दौरान दरवाजे के पास खड़े न हों। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, चाहे त्योहार कितना भी जरूरी क्यों न हो।
पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु (Accidental Death Report) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, यह भी जांच की जा रही है कि क्या ट्रेन में सुरक्षा कर्मी पर्याप्त संख्या में मौजूद थे या नहीं।
त्योहारों के बीच सुरक्षा का सवाल
हर साल त्योहारों के दौरान इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। लोग किसी भी कीमत पर अपने घर पहुंचना चाहते हैं, लेकिन कभी-कभी ये जल्दबाज़ी किसी की जिंदगी की कीमत बन जाती है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि सुरक्षा सिर्फ रेलवे की नहीं, हमारी भी जिम्मेदारी है। भीड़ में धक्का-मुक्की, दरवाजे पर बैठना या चलती ट्रेन में यात्रा करना, ये सब छोटे खतरे नहीं हैं।
आम जनता की भावनाएं
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। ट्विटर और फेसबुक पर #KarmbhumiExpress, #NashikRoad, #TrainAccident जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
कई लोगों ने लिखा —
“वो घर लौटना चाहते थे, लेकिन मंज़िल तक नहीं पहुंच सके। ये सिर्फ हादसा नहीं, एक चेतावनी है।”
निष्कर्ष नहीं, एक अपील
कभी-कभी हम भूल जाते हैं कि घर पहुंचने की जल्दी में हम अपनी जिंदगी को दांव पर लगा देते हैं।
कर्मभूमि एक्सप्रेस हादसा हमें यही सिखाता है —
सुरक्षित यात्रा करें, क्योंकि घर वही लौट सकते हैं जो जिंदा लौटते हैं।